
श्री महाकालेश्वर चालीसा |
दोहा
जय महाकाल महेश प्रभु, जय शिव शंकर नाथ।
उज्जैन धाम विराजते, रखो भक्तों की लाज॥
चौपाई
जय जय श्री महाकालेश्वर।
अविनाशी शिव, त्रिपुरेश्वर॥
उज्जैन नगरी धाम तुम्हारा।
तीनों लोक में यश है न्यारा॥
क्षिप्रा तट पर ज्योतिर्मय।
दर्शन से हो मंगलमय॥
भस्म आरती अति सुखकारी।
दर्शन पाकर मिटे दुख भारी॥
भक्तों के संकट हरने वाले।
दीन दुखी के रखवाले॥
कालों के भी काल कहाए।
महाकाल नाम जगत में पाए॥
ब्रह्मा विष्णु ध्यान लगावें।
देव मुनि सब शीश नवावें॥
नंदीश्वर द्वार पर विराजे।
शिव के दर्शन मन को साजे॥
त्रिशूल डमरू हाथ सुहावें।
जटा में गंगा शोभा पावें॥
मस्तक चंद्र विराजित प्यारा।
नीलकंठ रूप अति न्यारा॥
जो भक्त तुम्हारा ध्यान लगावे।
मनवांछित फल वह नर पावे॥
रोग शोक सब दूर भगाओ।
भक्तों के सब कष्ट मिटाओ॥
भय संकट सब हरने वाले।
शिव शंकर हो दीनदयाले॥
काल सर्प के दोष मिटाओ।
जीवन में सुख-शांति लाओ॥
महाकाल की महिमा भारी।
वेद पुराण करें गुणगारी॥
उज्जैन धाम अति पावन।
जहाँ विराजे शिव मनभावन॥
प्रातःकाल जो ध्यान लगाए।
महाकाल की कृपा वह पाए॥
संध्या समय दीप जलावे।
सकल मनोरथ सिद्ध करावे॥
सोमवार जो पूजन करता।
शिव कृपा से भय नहीं रहता॥
श्रावण मास में जो ध्यावे।
शिव का आशीष शीघ्र ही पावे॥
बेलपत्र जल शिव पर चढ़ावे।
हर हर महादेव गुण गावें॥
मन वचन कर्म से जो ध्यावे।
महाकाल की शरण वह पावे॥
जन्म-जन्म के पाप मिटाओ।
भक्तों को भवपार लगाओ॥
दुःख दारिद्र्य दूर करो प्रभु।
सुख-समृद्धि से भर दो प्रभु॥
संतान सुख और धन-धान्य दो।
भक्तों को निर्मल ज्ञान भी दो॥
अंत समय जब प्राण पधारे।
महाकाल अपने चरण सँवारे॥
जो यह चालीसा प्रेम से गावे।
शिव का परम आशीष वह पावे॥
हर संकट से रक्षा करना।
भक्तों पर कृपा सदा ही धरना॥
जय महाकाल जय त्रिपुरारी।
जय शिव शंकर मंगलकारी॥
दोहा
महाकालेश्वर नाथ प्रभु, उज्जैन धाम महान।
शरण पड़े जो भक्तजन, राखो उनकी आन॥
हर हर महादेव गूँजे, गूँजे जय जयकार।
महाकाल की कृपा से, हो जीवन सुखसार॥
जय श्री महाकालेश्वर
हर हर महादेव
