
प्रत्यंगिरा देवी चालीसा
दोहा
जय जय माता प्रत्यंगिरा, आदिशक्ति अवतार।
भक्तों के संकट हरहु माँ, करहु कृपा अपार॥
उग्र रूप धारण करो, दुष्टों का संहार।
शरण पड़े जो भक्त तेरे, करो सदा उद्धार॥
चौपाई
जय प्रत्यंगिरा मात भवानी।
महाशक्ति जग की कल्याणी॥
सिंहवदना रूप तुम्हारा।
तेज तुम्हारा अति उजियारा॥
भैरवी रूप धरे जब माता।
दुष्ट दलन करहु जग त्राता॥
काली रूप तुम्हारा भारी।
भक्तों की तुम मातु दुलारी॥
लाल जिह्वा विकराल स्वरूपा।
दुष्ट विनाशिनी शक्ति अनूपा॥
कर में खड्ग त्रिशूल सुहावें।
भक्तों के भय दूर भगावें॥
अग्नि समान तुम्हारी काया।
जिसने ध्याया भय नहिं पाया॥
शिव शक्ति की तुम हो छाया।
तुम बिन कौन जगत रखवाया॥
नरसिंह की शक्ति महान।
प्रत्यंगिरा माता बलवान॥
अंधकार को दूर भगाती।
भक्त हृदय में ज्योति जगाती॥
नकारात्मकता दूर करो माँ।
मन में भक्ति भरपूर करो माँ॥
दुष्ट विचार सब दूर भगाओ।
सद्बुद्धि का दीप जलाओ॥
भय संकट सब हरने वाली।
माँ तुम हो जग की रखवाली॥
जो जन सच्चे मन से ध्यावे।
माता उसकी लाज बचावे॥
कष्ट क्लेश सब दूर मिटाओ।
जीवन में सुख-शांति लाओ॥
रोग शोक संताप हरहु माँ।
भक्तों के दुख दूर करहु माँ॥
गृह में मंगल सदा कराओ।
कलह सभी को दूर भगाओ॥
धर्म मार्ग पर चलना सिखाओ।
मन में सत्य प्रेम बसाओ॥
माँ की महिमा वेद बखाने।
देव मुनि सब शीश नवाने॥
जो कोई तेरी शरण में आता।
माता उसको गले लगाता॥
असुर शक्ति का नाश कराती।
सत्य धर्म की ज्योति जलाती॥
मंत्र जाप जो ध्यान लगावे।
तेरी कृपा शीघ्र ही पावे॥
शनिवार या शुभ दिन ध्यावे।
श्रद्धा से जो दीप जलावे॥
काले तिल और पुष्प चढ़ावे।
माता का आशीष वह पावे॥
पर सच्ची पूजा मन से होती।
भक्ति बिना पूजा नहिं होती॥
माँ तुम शक्ति ज्ञान की दाता।
दीन दुखी की भाग्य विधाता॥
संतान, धन, सुख की दात्री।
भक्तों की तुम हो सुखदात्री॥
मनोकामना पूर्ण कराओ।
अपने चरणों में स्थान दिलाओ॥
अंत समय जब प्राण हमारे।
माता रहना सदा सहारे॥
प्रत्यंगिरा नाम जो गावे।
भय बंधन से मुक्त हो जावे॥
माँ की कृपा जिस पर हो जाए।
उसका जीवन धन्य हो जाए॥
शरण तुम्हारी आई भवानी।
रखियो लाज मेरी कल्याणी॥
दोहा
प्रत्यंगिरा माता भवानी, शक्ति स्वरूप अपार।
भक्तों के सब कष्ट हरहु माँ, करहु कृपा साकार॥
जो यह चालीसा प्रेम से, नित श्रद्धा से गाए।
माँ प्रत्यंगिरा की कृपा से, सुख-शांति जीवन पाए॥
॥ जय माँ प्रत्यंगिरा देवी ॥
॥ आदिशक्ति माता की जय ॥
