
श्री भीमाशंकर चालीसा
दोहा
जय भीमाशंकर नाथ प्रभु, जय शिव शंकर देव।
भक्तों के संकट हरहु प्रभु, करहु कृपा गुरुदेव॥
चौपाई
जय जय श्री भीमाशंकर।
जय त्रिपुरारी शिव शंकर॥
सह्याद्रि गिरि धाम तुम्हारा।
तीनों लोक में यश है न्यारा॥
पावन वन में धाम सुहावन।
ज्योतिर्लिंग रूप मनभावन॥
भीमा नदी की पावन धारा।
करती है गुणगान तुम्हारा॥
कुंभकर्ण के पुत्र बलशाली।
भीमासुर था दुष्ट विकराली॥
देव मुनि सब त्रासित भारी।
तब तुमने ली लीला न्यारी॥
भक्तों की जब पीड़ा जानी।
प्रकट हुए भोले कल्याणी॥
भीमासुर का अंत किया प्रभु।
भक्तों का भय दूर किया प्रभु॥
ज्योतिर्लिंग रूप में विराजे।
भक्त तुम्हारे शीश नवाजे॥
ब्रह्मा विष्णु ध्यान लगावें।
देव मुनि सब गुण गावे॥
नंदीश्वर द्वार पर विराजे।
शिव के दर्शन मन को साजे॥
जटा में गंगा शीश सुहावे।
मस्तक चंद्र कला लहरावे॥
नीलकंठ त्रिशूल धारी।
डमरू ध्वनि अति सुखकारी॥
बेलपत्र जल अर्पण करें जो।
शिव कृपा से मंगल भरें वो॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावें।
हर हर महादेव गुण गावें॥
जो नर तुमको ध्यान लगाता।
मनवांछित फल वह नर पाता॥
रोग शोक सब दूर भगाओ।
भक्तों के सब कष्ट मिटाओ॥
दुःख दारिद्र्य दूर करो प्रभु।
सुख-शांति से भर दो प्रभु॥
भय संकट सब हरने वाले।
दीन दुखी के रखवाले॥
सह्याद्रि की महिमा अति भारी।
पावन भूमि लगे अति प्यारी॥
प्रातःकाल जो ध्यान लगाए।
भीमाशंकर कृपा वह पाए॥
संध्या समय दीप जलावे।
शिव का आशीष शीघ्र ही पावे॥
सोमवार को पूजन करता।
उसके मन में भय नहीं रहता॥
श्रावण मास में जो ध्यावे।
शिव का परम आशीष वह पावे॥
मन वचन कर्म से जो ध्यावे।
भीमाशंकर शरण वह पावे॥
जन्म-जन्म के पाप मिटाओ।
भवसागर से पार लगाओ॥
ज्ञान भक्ति का दीप जलाओ।
मन का अंधकार मिटाओ॥
संतान सुख और धन-धान्य दो।
भक्तों को निर्मल ज्ञान भी दो॥
अंत समय जब प्राण पधारे।
शिव अपने चरणों में धारे॥
जो यह चालीसा प्रेम से गावे।
शिव का परम आशीष वह पावे॥
हर संकट से रक्षा करना।
भक्तों पर कृपा सदा ही धरना॥
जय भीमाशंकर त्रिपुरारी।
जय शिव शंकर मंगलकारी॥
दोहा
भीमाशंकर नाथ प्रभु, सह्याद्रि धाम महान।
शरण पड़े जो भक्तजन, राखो उनकी आन॥
हर हर महादेव गूँजे, गूँजे जय जयकार।
भीमाशंकर की कृपा से, हो जीवन सुखसार॥
जय श्री भीमाशंकर
हर हर महादेव
