
अहोई माता चालीसा
दोहा
अहोई माता विनति सुनो,
सेवक की रखो लाज।
संतान सुख समृद्धि दो,
पूरण हो सब काज॥
चौपाई
जय अहोई अंबे जगदम्बा।
सदा सहाय करो सुख कंबा॥
नारी तव व्रत करती प्यारी।
सुत सुख पाए सदा सुखकारी॥
निर्धन धनी, हीन सुख पावे।
दरिद्र मिटे, वैभव बरसावे॥
सिंहासिन तू जगत भवानी।
भक्त बचावन वाली रानी॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावा।
भक्त मनोवांछित फल पावा॥
पुत्रवती नारी सुख पावे।
पुत्रहीन के पुत्र बसावे॥
सुख सम्पत्ति देहि जगदम्बा।
दुख दरिद्र मिटे सब कंबा॥
अष्टमी तिथि व्रत जो नारी।
करहि श्रद्धा सहित तैयारी॥
सदा सुहागिन वह नारी होई।
कृपा करें जगजननि अहोई॥
दोहा
अहोई माता की कृपा,
रहे सदा परिवार।
संतान सुख वैभव बढ़े,
मिटे पाप संहार॥
