
श्री दंतेश्वरी चालीसा दोहा
जय माँ दंतेश्वरी भवानी, दंतेवाड़ा धाम।
भक्तन के संकट हरहु माँ, जपें तुम्हारा नाम॥
दीन-दुखी की आस हो, माता तुम आधार।
चरण शरण में राखिए, भवसागर से पार॥
चौपाई
जय जय दंतेश्वरी माता।
जगत जननि तुम जग विख्याता॥
शक्ति स्वरूपा जगत की रानी।
महिमा अमित कहत मुनि ज्ञानी॥
दंतेवाड़ा धाम सुहावन।
भक्तन मन को अति सुख पावन॥
शंखिनी डंकिनी तट वासा।
पावन करती सकल निवासा॥
माँ तुम जग की शक्ति अपारा।
तुम बिन कौन हमारा सहारा॥
सिंह वाहिनी रूप तुम्हारा।
दुष्ट दलन करहु दुख हारा॥
मुकुट सुहावन शीश विराजे।
मणि कुंडल तन पर अति साजे॥
कर में खड्ग त्रिशूल सुहावन।
दर्शन से हो पाप नसावन॥
लाल चुनरिया तन पर सोहे।
देखत भक्तन मन सुख मोहे॥
माँ दंतेश्वरी नाम तुम्हारा।
भक्तन का तुम एक सहारा॥
सती के दंत जहाँ पर गिरे।
शक्ति पीठ पावन तब धरे॥
देव ऋषि मुनि ध्यान लगावें।
नारद नित गुण गान सुनावें॥
भैरव संग तुम्हारा वासा।
भक्तन की तुम पूरी आशा॥
जो नर श्रद्धा शीश नवावे।
मनवांछित फल वह नर पावे॥
रोग शोक सब दूर भगाओ।
दीनन पर अपनी दया दिखाओ॥
संकट में जो नाम पुकारे।
माता तुरत कष्ट सब टारे॥
भय बाधा सब दूर करो माँ।
भक्तन का कल्याण करो माँ॥
धन-धान्य सुख-शांति प्रदाता।
सदा रहो तुम भक्तन माता॥
संतान सुख की आस जो लावे।
तेरी कृपा से सुख वह पावे॥
घर-परिवार रहे सुखमय सारा।
माता तुम हो सबका सहारा॥
दंतेवाड़ा की भूमि सुहानी।
महिमा तेरी जग में बखानी॥
नवरात्रों में दीप जलावें।
भक्ति भाव से शीश नवावें॥
लाल फूल अर्पण जो करते।
माँ के चरणों में मन धरते॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावें।
माता का आशीष वे पावें॥
दीन दुखी की सुनो पुकार।
माँ तुम हो सबकी रखवार॥
अज्ञान अंधकार मिटाओ।
ज्ञान भक्ति का दीप जलाओ॥
मोह माया से हमें बचाओ।
सत्य धर्म के मार्ग चलाओ॥
कर्मों के सब दोष मिटाओ।
अपने चरणों में स्थान दिलाओ॥
जनम-जनम की पीड़ा हर लो।
माँ भवसागर पार कर दो॥
दंतेश्वरी माँ दया करो।
अपने भक्तों पर कृपा धरो॥
जो यह चालीसा नित गावे।
माता का आशीष वह पावे॥
मन में श्रद्धा प्रेम बढ़ेगा।
जीवन में मंगल ही चढ़ेगा॥
अंत समय जब प्राण निकलें।
माता चरणों में हम मिलें॥
हे जगदंबे दया तुम्हारी।
सदा रहे माँ कृपा तुम्हारी॥
दोहा ॥
दंतेश्वरी माँ शक्ति तुम, भक्तन की रखवार।
चरण शरण में राखिए, भवसागर से पार॥
जय जय माँ दंतेश्वरी, महिमा अपरंपार।
दीनन पर कृपा कीजिए, माता बारंबार॥
॥ इति श्री दंतेश्वरी चालीसा सम्पूर्ण ॥
