
अय्यप्पा चालीसा
जय अय्यप्पा हरिहर पुत्रा,
मणिकंठ ब्रह्मचारी पवित्रा॥
पम्बा से सन्निधानम जाते,
स्वामिये शरणम् सब गाते॥
अठारह सीढ़ी चढ़े जो कोई,
इरुमुड़ी सर पर धर सोई॥
चालीस दिन का व्रत जो धारे,
माला बांधे गुरुस्वामी पधारे॥
मकर ज्योति का दर्शन पाता,
पुण्य अनंत मन में समाता॥
धर्मशास्ता भूतनाथ कहलाओ,
शबरीमलै के स्वामी अय्यप्पा॥
॥ स्वामीये शरणम् अय्यप्पा ॥
