
शबरी चालीसा
दोहा
जय शबरी माता भवानी, भक्तन की रखवाली।
राम भक्ति में लीन रहो, तुम हो दीन दयाली॥
भीलनी रूप धरि जग में, प्रेम भक्ति की खान।
झूठे बेर प्रभु राम को, अर्पित किए महान॥
चौपाई
जय जय शबरी मातु भवानी।
राम भक्त तुम परम सुहानी॥
वन में रहकर तप तुम कीन्हा।
प्रभु श्रीराम का ध्यान ही लीन्हा॥
मतंग ऋषि की शिष्या बनकर।
सेवा की तुम मन अर्पण कर॥
गुरु के वचन हृदय में धारे।
राम मिलन के स्वप्न सँवारे॥
आश्रम में तुम राह निहारी।
कब आएंगे राम मुरारी॥
प्रात उठकर पंथ बुहारा।
राम नाम था सबसे प्यारा॥
वन से बेर चुनकर तुम लाती।
प्रेम सहित उनको सजाती॥
मीठे बेर प्रभु हेतु सँवारे।
राम मिलन के दिन थे न्यारे॥
एक दिवस आए राम दुलारे।
संग लक्ष्मण वीर हमारे॥
देख प्रभु को हर्षित हुई।
आँखों से प्रेमधारा बही॥
चरण कमल प्रभु के धोए।
मन के सारे संताप खोए॥
प्रेम सहित बेर अर्पण कीन्हे।
राम ने प्रेम से उनको लीन्हे॥
जूठे बेर समझ जग हँसता।
राम प्रेम में भेद न करता॥
शबरी की भक्ति देख रघुराई।
प्रेम की महिमा जग में गाई॥
जाति-पाति का भेद मिटाया।
सच्ची भक्ति का पाठ पढ़ाया॥
नवधा भक्ति राम ने बतलाई।
शबरी ने वह राह अपनाई॥
संतों की सेवा प्रथम बताई।
दूसरी कथा राम गुण गाई॥
गुरु चरणों में प्रेम बताया।
तीसरी भक्ति रूप समझाया॥
मंत्र जाप में मन को लगाना।
संतोष भाव हृदय में लाना॥
दोष न देखो जग के भाई।
हरि में रखो प्रीति समाई॥
राम नाम जो हृदय बसावे।
जीवन में आनंद वह पावे॥
शबरी माता दीन सहाई।
भक्तों की तुम करो भलाई॥
दुख संकट सब दूर भगाओ।
राम भक्ति का मार्ग दिखाओ॥
जिस घर शबरी नाम पुकारा।
वहाँ रहे प्रभु राम सहारा॥
मन में श्रद्धा प्रेम जगाओ।
राम चरण में ध्यान लगाओ॥
शबरी माता कृपा कर देना।
भक्ति का अमृत हमें पिला देना॥
अहंकार और मोह मिटाओ।
सत्य प्रेम का दीप जलाओ॥
राम नाम की ज्योति जले।
जीवन के सब अंधकार टले॥
जो नर शबरी चालीसा गावे।
राम कृपा का फल वह पावे॥
सच्चे मन से ध्यान लगाए।
मनवांछित फल प्राप्त कर पाए॥
शबरी माता की जय बोलो।
राम नाम का अमृत घोलो॥
सीता राम हृदय में ध्याओ।
जीवन सफल और सुखमय बनाओ॥
दोहा
शबरी माता प्रेम की, अद्भुत अमर कहानी।
राम चरण में भक्ति मिली, धन्य हुई भीलनी रानी॥
जो श्रद्धा से पाठ करे, राम कृपा वह पाए।
शबरी माता की कृपा से, भवसागर तर जाए॥
॥ श्री शबरी माता की जय ॥
॥ जय श्री राम ॥
