
अर्धनारीश्वर चालीसा
दोहा
शिव शक्ति का रूप है, अर्धनारीश्वर नाम।
नमन करूँ चरणों में, पूर्ण हो सब काम॥
आदि पुरुष और प्रकृति, एक ही काया माँय।
दया दृष्टि हम पर करो, शिव-गौरी सुखदाय॥
चौपाई
जय अर्धनारीश्वर सुखकारी।
शिव-शक्ति की महिमा भारी॥
एक अंग में शिव विराजे।
दूजे अंग उमा छवि साजे॥
मस्तक अर्ध जटा लहराए।
अर्ध भाग में केश सुहाए॥
अर्ध चंद्र शिव भाल विराजे।
अर्ध भाग में टीका साजे॥
कंठ एक विष की है धारा।
दूजे कंठ हार मनहारा॥
एक कान में कुंडल सोहे।
दूजे की बाली मन मोहे॥
व्याघ्र चर्म शिव अंग लपेटे।
पार्वती पटु वस्त्र समेटे॥
अर्ध अंग भस्म लपटाए।
अर्ध अंग चंदन महकाए॥
त्रिशूल डमरू एक हाथ साजे।
दूजे कर में कमल विराजे॥
रुद्र रूप शिव मंगलकारी।
ममतामयी माँ शक्ति प्यारी॥
नंदी वाहन शिव को भावे।
गौरा सिंह सवारी पावे॥
एक ही तन में दो अवतारा।
जैसे जल और जल की धारा॥
सृष्टि का आधार तुम्हीं हो।
शक्ति का अवतार तुम्हीं हो॥
पुरुष और नारी के संगम।
तुमसे ही जग हुआ मनोहर॥
जो कोई तुमको ध्यान लगावे।
मनवांछित फल सो नर पावे॥
विवाह बाधा दूर हो जावे।
सुखी गृहस्थी का वर पावे॥
गृह क्लेश सब मिटे तुम्हारे।
जो अर्धनारीश्वर को ध्यावे॥
प्रेम बढ़े पति और पत्नी में।
शांति रहे जीवन की बगिया में॥
दोहा
शिव-शक्ति की कृपा से, मिटे सकल संताप।
अर्धनारीश्वर सुमिरिए, कटे कोटि अपराध॥
यह चालीसा प्रेम से, पाठ करे जो कोय।
सुख, संपत्ति और शांति, उसे प्राप्त सब होय॥
॥ इति श्री अर्धनारीश्वर चालीसा सम्पूर्ण ॥
॥ हर हर महादेव ॥
॥ जय माँ पार्वती ॥
