
श्री कामदेव चालीसा
दोहा
नमो कामदेवाय नमः, शृंगार देव माई।
ज्ञान वैराग्य सर्व फल, होय तुम्हारी दाई॥
चौपाई
प्रेम, शृंगार, काम सुख दाई।
संसार में सबको मोहमाई॥
तन-मन में तुम उठाओ ज्वाला।
प्रेम-बाण से छेड़ो खेल निराला॥
शिव-पार्वती तुम्हारे पुजारी।
सृष्टि तुम्हारे बिना अधूरी सारी॥
रति संग रहो तुम सदैव साथ।
प्रेम जगाओ दिन और रात॥
युवावस्था में तुम ही बसो।
जीवन में प्रेम-रस भरो॥
हर दिल में उठाओ प्रेम की लहर।
दांपत्य जीवन में सुख भरो हर पहर॥
सपने सजाओ प्यार भरे।
हर मन में मिलन के दीप जले॥
तुम्हारा ध्यान जो करते सच्चा।
पाते प्रेम-प्रसाद है अच्छा॥
क्लेश दूर कर दिल को मिलाओ।
प्रेम में बसा जीवन सजाओ॥
प्रेम बिना जीवन सूना है।
तुम बिन जग यह अधूरा है॥
कामदेव प्रेम में शक्ति भरो।
सबके जीवन में तुम रंग भरो॥
जो कोई कामदेव का ध्यान लगाए।
वह प्रेम-सुख का फल पाए॥
क्लेश मिटे, हो सुख ही सुख।
घर में बसें प्रेम की मधुर धुन॥
चालीसा पाठ प्रेम संबंधों में।
स्थायित्व आए जीवन के बंधनों में॥
पति-पत्नी में सामंजस्य बढ़ता।
प्रेम और विश्वास सदा रहता॥
व्यक्ति में आकर्षण बढ़ता जाए।
प्रभावशीलता जीवन में आए॥
विवाह में जो बाधा आए।
कामदेव कृपा से दूर हो जाए॥
प्रेम संबंधों में स्थिरता आए।
विश्वास और मधुरता बढ़ जाए॥
मानसिक शांति मन में आए।
तनाव सभी दूर हो जाए॥
प्रेम और आकर्षण में आत्मविश्वास बढ़े।
जीवन में नव उत्साह चढ़े॥
कामदेव की कृपा जो पाए।
नकारात्मकता दूर हो जाए॥
जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आए।
हर मन में आशा दीप जलाए॥
मनोकामना पूर्ण हो जाए।
प्रेम का सुख जीवन में आए॥
संबंधों में मधुरता आए।
हर रिश्ते में प्रेम समाए॥
रिश्तों में प्रेम और सौहार्द बढ़े।
जीवन संतुलित और सुखमय चढ़े॥
दोहा
कामदेव की कृपा मिले, प्रेम-सुख हो अपार।
रति संग हे कामदेव, रखियो भक्तों की लाज॥
॥ इति श्री कामदेव चालीसा सम्पूर्ण ॥
॥ श्री कामदेवाय नमः ॥
