
श्री यमराज चालीसा
दोहा
जय यम धरनीधर महाबल, जय धर्मराज महान।
भक्तों के रखवाले तुम हो, करहु कृपा भगवान॥
चौपाई
जय यमराज धर्म अधीशा।
जगत पालक पुण्य प्रतीक्षा॥
कालरूप धरि भय हरणा।
पापी जनन का करहु तरणा॥
महिषवाहन गदा तुम्हारी।
करहु दंड जगत दुःख भारी॥
न्याय करो सब जीव समान।
देखहु सबके कर्म प्रधान॥
चित्रगुप्त लेखा बनावें।
कर्मानुसार दंड दिलावें॥
पापी नरक भुगतने पावे।
पुण्यी स्वर्ग सुखी हो जावे॥
धर्मराज तुम न्यायकारी।
महिमा तुम्हरी अति है न्यारी॥
भक्त तुम्हारे शरण में आवें।
संकट सब हरि सुख पावें॥
जो श्रद्धा से नाम तुम्हारा।
जपे सदा वह हो सुखधारा॥
कालचक्र से जग चलता है।
कोई न मृत्यु टल पाता है॥
जो सत्य धर्म का पालन कर।
भवसागर से तर जाता नर॥
धर्मपुत्र तुम धर्म निभावो।
न्याय धर्म का राज सजावो॥
जीवों के कर्मों का लेखा।
तुमसे कोई नहीं है अनदेखा॥
चित्रगुप्त संग न्याय करो तुम।
सत्य मार्ग का ज्ञान धरो तुम॥
पाप कर्म से दूर भगाओ।
सदाचार का मार्ग दिखाओ॥
अकाल मृत्यु दूर करि देवो।
भक्ति-भाव को सफल बनावो॥
भय और चिंता दूर भगाओ।
मन में धर्म भावना लाओ॥
जो जन यम चालीसा गावे।
भक्ति सहित मन ध्यान लगावे॥
उसका संकट मिटे भारी।
पावे सुख-शांति संसारी॥
आयु, आरोग्य सुख प्रदान करो।
भक्तों का तुम कल्याण करो॥
सत्य धर्म पर चलना सिखाओ।
कर्मों का फल ज्ञान कराओ॥
दीन-दुखी की रक्षा करना।
सत्य न्याय की मर्यादा धरना॥
जो भी तुम्हें श्रद्धा से ध्यावे।
धर्मराज की कृपा वह पावे॥
पाप कर्म से मन को बचावे।
सद्कर्मों में जीवन लगाए॥
जय जय यम धर्म अधीशा।
जय धर्मराज जगत के ईशा॥
कृपा करो हे धर्म विधाता।
सत्य धर्म के तुम हो दाता॥
दोहा
यमराज चालीसा भजे, श्रद्धा सहित जो कोई।
धर्म मार्ग पर चलता रहे, सुख-शांति पावे सोई॥
धर्मराज कृपा कीजिए, रखियो सबकी लाज।
सत्य कर्म का ज्ञान दो, हे प्रभु धर्मराज॥
॥ इति श्री यमराज चालीसा सम्पूर्ण ॥
॥ जय धर्मराज ॥
