
श्री वैद्यनाथ चालीसा
दोहा
जय वैद्यनाथ महेश प्रभु, जय शिव शंकर नाथ।
दीन दुखी के कष्ट हरहु, रखियो भक्तों की लाज॥
चौपाई
जय जय श्री वैद्यनाथ।
जय भोलेनाथ दीन के नाथ॥
देवघर धाम विराजत स्वामी।
महिमा तेरी जग में नामी॥
ज्योतिर्लिंग रूप तुम्हारा।
दर्शन से मिटे दुःख सारा॥
रावण ने तप किया भारी।
प्रसन्न भए तब त्रिपुरारी॥
दशमुख रावण शीश चढ़ाए।
शिव ने उसको वर दिखलाए॥
वैद्य रूप धर रोग मिटाया।
इस कारण वैद्यनाथ कहलाया॥
देव मुनि सब ध्यान लगावें।
हर हर महादेव गुण गावें॥
नंदीश्वर द्वार पर विराजे।
भक्त तुम्हारे शीश नवाजे॥
जटा में गंगा शोभा पावे।
मस्तक चंद्र सुशोभित भावे॥
नीलकंठ त्रिशूल धारी।
डमरू ध्वनि अति सुखकारी॥
बेलपत्र और जल चढ़ावें।
भक्ति भाव से शीश नवावें॥
धूप दीप नैवेद्य सजावें।
शिव का पावन नाम जपावें॥
जो नर तुमको ध्यान लगाता।
मनवांछित फल वह नर पाता॥
रोग शोक सब दूर भगाओ।
भक्तों के सब कष्ट मिटाओ॥
दुःख दारिद्र्य दूर करो प्रभु।
सुख-शांति से भर दो प्रभु॥
वैद्यनाथ तुम दीन दयाला।
भक्तों के हो सदा रखवाला॥
रोगी जो तेरी शरण में आता।
शिव कृपा से सुख वह पाता॥
भय संकट सब हरने वाले।
शरणागत के भाग्य सँवारे॥
देवघर की महिमा अति भारी।
तीर्थों में है शोभा न्यारी॥
प्रातःकाल जो ध्यान लगाए।
वैद्यनाथ की कृपा वह पाए॥
संध्या समय दीप जलावे।
सकल मनोरथ सिद्ध करावे॥
सोमवार को पूजन करता।
उसके मन में भय नहीं रहता॥
श्रावण मास में जो ध्यावे।
शिव का परम आशीष वह पावे॥
कांवड़ लेकर भक्त जो आए।
हर हर बम का जयकारा लगाए॥
मन वचन कर्म से जो ध्यावे।
वैद्यनाथ की शरण वह पावे॥
जन्म-जन्म के पाप मिटाओ।
भवसागर से पार लगाओ॥
ज्ञान भक्ति का दीप जलाओ।
मन का अंधकार मिटाओ॥
धन-धान्य सुख-शांति प्रदान करो।
भक्तों का जीवन धन्य करो॥
अंत समय जब प्राण पधारे।
शिव अपने चरणों में धारे॥
जो यह चालीसा प्रेम से गावे।
शिव का परम आशीष वह पावे॥
हर संकट से रक्षा करना।
भक्तों पर कृपा सदा ही धरना॥
जय वैद्यनाथ त्रिपुरारी।
जय शिव शंकर मंगलकारी॥
दोहा
वैद्यनाथ नाथ प्रभु, देवघर धाम महान।
शरण पड़े जो भक्तजन, राखो उनकी आन॥
हर हर महादेव गूँजे, गूँजे जय जयकार।
वैद्यनाथ की कृपा से, हो जीवन सुखसार॥
जय श्री वैद्यनाथ
हर हर महादेव
