श्री सोमनाथ चालीसा | Shree Somnath Chalisa

श्री सोमनाथ चालीसा

दोहा

सोमनाथ प्रभु देव तुम, शिव शंकर भगवान।
कृपा करो हे नाथ प्रभु, हर लो सकल अज्ञान॥

चौपाई

जय जय श्री सोमनाथ, शिव शंकर अविनाशी।
ज्योतिर्लिंग रूप में, महिमा अति सुखदायी॥

प्रभास क्षेत्र में धाम तुम्हारा।
भक्तों को लगता अति प्यारा॥

चंद्रदेव ने तप किया भारी।
तब प्रसन्न भए त्रिपुरारी॥

दक्ष प्रजापति के शाप से हारा।
शिव ने चंद्र का कष्ट निवारा॥

चंद्रमा को तुमने वर दीन्हा।
सोमनाथ नाम जग में कीन्हा॥

ज्योतिर्मय शिवलिंग सुहावन।
दर्शन से हो पाप नसावन॥

गंगाजल से भक्त नहावें।
बेलपत्र चढ़ाकर मनभावें॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावें।
हर हर महादेव गुण गावें॥

नंदीश्वर द्वार पर विराजे।
शिव के दर्शन मन को साजे॥

ब्रह्मा विष्णु ध्यान लगावें।
देव मुनि सब शीश नवावें॥

जो नर श्रद्धा से गुण गाता।
मनवांछित फल वह नर पाता॥

दुख दारिद्र्य सब दूर भगाओ।
भक्तों के संकट हर जाओ॥

रोग शोक भय नष्ट करो प्रभु।
जीवन में सुख-संपत्ति भर दो॥

भवसागर से पार लगाओ।
अपने चरणों में स्थान दिलाओ॥

प्रभास क्षेत्र पावन अति भारी।
महिमा इसकी जग में न्यारी॥

सोमनाथ तुम दीन दयाला।
भक्तों के हो रखवाला॥

प्रातःकाल जो ध्यान लगाए।
शिव कृपा से मंगल पाए॥

संध्या समय जो दीप जलावे।
सकल मनोरथ सिद्ध करावे॥

मन वचन कर्म से जो ध्यावे।
सोमनाथ की कृपा वह पावे॥

श्रद्धा भक्ति हृदय में धारे।
शिव शंकर उसके काज सँवारे॥

जन्म-जन्म के पाप मिटाओ।
भक्तों को निज धाम बुलाओ॥

त्रिशूल डमरू हाथ विराजे।
मस्तक चंद्र सुशोभित साजे॥

जटा में गंगा शोभा पावे।
नीलकंठ जग मन हरषावे॥

कालों के भी काल कहाए।
भक्तों के सब भय मिटाए॥

सोमनाथ प्रभु ज्योति अपारा।
तीनों लोक में नाम तुम्हारा॥

जो चालीसा प्रेम से गावे।
शिव का परम आशीष वह पावे॥

धन-धान्य सुख शांति मिले घर।
कृपा रहे शिव की जीवन भर॥

अंत समय जब प्राण पधारे।
शिव चरणों में भक्त को धारे॥

हर हर महादेव जयकारी।
सोमनाथ प्रभु मंगलकारी॥

दोहा

सोमनाथ प्रभु ज्योतिर्मय, प्रभास धाम महान।
शरण पड़े जो भक्तजन, राखो उनकी आन॥

हर हर महादेव की, गूँजे जय जयकार।
सोमनाथ की कृपा से, हो जीवन सुखसार॥

जय श्री सोमनाथ
हर हर महादेव

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