कुष्मांडा चालीसा | Kushmanda Chalisa

कुष्मांडा चालीसा

दोहा

माता कुष्मांडा की जय,

करुणा की सागर।

सुख-सम्पत्ति देने वाली,

जय मां, जय अंबर॥

जयति जयति जगत की माता।

कुष्मांडा देवी सुखदायी भ्राता॥

शुम्भ-निशुम्भ हरणी माता।

भक्तों की विपदा हरणी भ्राता॥

कुश (कुमार) मंद हर्ष से भरी।

चारों ओर कृपा की झरी॥

हंस पर सवार हे माता।

कृपा का अविरल बहाता॥

कुम्भ करों में जल से भरे।

धन-धान्य से भरे सारे घर॥

आभा से दीप्त हे माता।

भक्तों के संकट मिटाता॥

चतुर्थी तिथि शुभ कहलाती।

व्रत रखने से सब सफल होती॥

मंत्र का जप करों हे प्यारे।

जीवन सुखी हो जाए सारे॥

अंत में सुन लो अरज हमारी।

जीवन सवारे भवसागर से॥

जय माता कुष्मांडा भवानी।

कृपा करो हे जगत की रानी॥

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